पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा हिंदू धर्म में काफी पुरानी है। इसे लेकर कई मान्यताएं और धार्मिक कारण बताए जाते हैं। आइए जानते हैं इनमें से कुछ प्रमुख कारण:
- देवी-देवताओं का वास: मान्यता है कि पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दीपक जलाने से देवताओं को प्रसन्न किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है।
- पितृ दोष का निवारण: पीपल की पूजा को पितृ दोष निवारण का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में पितरों का भी वास होता है। इसलिए पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से पितर प्रसन्न होते हैं और उन्हें मोक्ष मिलता है।
- ग्रह दोष का निवारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीपल के पेड़ की पूजा करने से ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है। विशेषकर शनि ग्रह से संबंधित दोषों के निवारण के लिए पीपल की पूजा की जाती है।
- अन्य लाभ:
- पीपल की पूजा करने से मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- यह आध्यात्मिक विकास में भी मदद करता है।
- पीपल का पेड़ पर्यावरण के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
कब और कैसे जलाएं दीपक?
- समय: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का सबसे शुभ समय सुबह और शाम का होता है।
- दिन: शनिवार के दिन पीपल की पूजा और दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
- तेल: दीपक जलाने के लिए सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है।
- विधि: दीपक जलाने से पहले पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और फिर दीपक जलाकर 7 परिक्रमा लगाएं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- रात में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना वर्जित माना जाता है।
- पीपल के पेड़ को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
- दीपक जलाते समय सावधानी बरतें।
निष्कर्ष
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित है। यह एक ऐसी परंपरा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है। हालांकि, यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सिद्ध नहीं है।
नोट: यह जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपने गुरु या पंडित से सलाह लेना उचित होता है।