Tuesday, October 4, 2011

यह जिसने भी देखा कांप गया लेकिन होना तो था 'चमत्कार'


रायपुर / बिलासपुर.रायपुर बिलासपुर रोड पर मंगलवार को दोपहर 3:42 बजे दैनिक भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट भूपेश केशरवानी को यह रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य देखने को मिला।
 
एक ट्रक की ठोकर से एक बाइक सवार ट्रक के नीचे आ गया। देखने वालों का कलेजा मुंह को आ गया। लेकिन वे तब हैरत में पड़ गए जब बाइक सवार को सही सलामत ट्रक के नीचे से निकाल लिया गया। उसे इस घटना में बहुत मामूली चोट आई। दहशत अलबत्ता देर तक बरकरार रही।
 
1- ट्रक की ठोकर से बाइक सवार ट्रक के नीचे आ गया। बाइक छिटक गई। बाइक सवार ने मदद के लिए आवाज लगाई।
 
2- उसने लोगों की ओर हाथ फैलाए। इस बीच लोगों ने ट्रक वाले को रोका कि वह ट्रक जहां के तहां खड़े रहने दे।
 
3-लोगों ने बाइक सवार के हाथ पकड़े और उसे बाहर खींच लिया। तत्काल 108 पर फोन किया गया। थाने को खबर की गई।
 
4-घटना से बाइक सवार सहम गया। जान बचाने के लिए उसने भगवान से मदद करने वालों का भी शुक्रिया अदा किया।

 
 
 

 
 

अपने जिगर के टुकड़ों को गोद देना चाहती है यह 'अभागी मां'


मुंगेर.संतान प्राप्ति के लिए एक मां को दर-दर की ठोकरें खाते देखा व सुना जाता रहा है। लेकिन बिहार के मुंगेर जिले में एक मां अपनी औलाद के लिए दूसरी मां ढूंढ रही है। गरीबी, बेबसी, लाचारी और बीमारी से परेशान मुन्नी की अंतिम इच्छा है कि उसके जीते-जी कोई उसके जिगर के टुकड़े का पालनहार मिल जाये।


क्योंकि दमे की बीमारी से जूझ रही मुन्नी को अब लगने लगा है कि पैसे तथा इलाज के अभाव में ना जाने उसकी सांसे कब थम जाए! इससे पहले वह अपने आंखों के सामने दोनों बच्चे को गोद देने के लिए तैयार है। ताकि वह चैन से आखरी सांस ले इस दुनिया से विदा हो सके।


..नियति को तो कुछ और ही मंजूर था


सफियावाद इलाके के हसनगंज मोहल्ले की रहने वाली पच्चीस वर्षीय मुन्नी की शादी वैसे तो कम उम्र में ही मोहन यादव के साथ हो गई थी।

तकरीबन छह साल मोहन के साथ मुन्नी का दाम्पत्य जीवन गुजरा। इस बीच एक बेटी चांदनी (६) तथा दूसरा बेटा सूरज के पैदा हुए अभी महज दस दिन भी नहीं हुए थे कि मुन्नी का बीमार पति ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

जन्दगी के मझधार में मुन्नी अपने दो बच्चों के साथ अकेली रह गई। मजबूरन दूसरों के घरों में जूठा बर्तन व झाड़ू-पोछा कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करने का बीड़ा उठाया। लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था। इस बीच मुन्नी दमे की बीमारी से ग्रसित हो गई।


उसके पास समुचित इलाज कराने के पैसे नहीं हैं। जिस कारण वह हताश व निराश हो गई है। बच्चे की परवरिश और बीमारी की चिंता उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही है। नौकरी छोड़ कर वह सदर अस्पताल में भर्ती हो गई है। लेकिन छुट्टी के बाद उसके समक्ष दो जून की रोटी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। जब तक सदर अस्पताल में भर्ती है तब तक उसे खाना तो मिलता रहा है। मुन्नी की दुखभरी दास्तां सुन वहां मौजूद लोगों ने कुछ खाना वगैरह दिया। वह कहती है कि बच्चे जब खाना मांगेंगे तो उन्हें दूंगी। लोगों के द्वारा मिले खाने को वह स्वयं खाने से इंकार करती है। मुन्नी कहती है कि बच्चे भूखे हैं उन्हें ही खिलाउंगी। वह कहती है कि कोई उसके दोनों बच्चे चांदनी (६) और डेढ़ वर्षीय सूरज को गोद ले ले ताकि वह चैन से अंतिम सांस ले सके। रोते-बिलखते मुन्नी की आंखें अब सूनी पड़ गई हैं और हर आते-जाते लोगों को टकटकी निगाह से देखती है। इस उम्मीद से कि कहीं तो उसके बच्चे का पालनहार मिल जाये।

क्या कहते हैं डीएम


मुन्नी के मामले में जिलाधिकारी कुलदीप नारायण ने बताया कि लाचार और बेबस महिलाओं के लिए जिला कल्याण विभाग द्वारा कार्यक्रम जिले में चलाया जा रहा है। जिसके तहत आवास व भोजन की मुफ्त व्यवस्था है। मुन्नी चाहे तो वहां रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुन्नी के लिए जिला प्रशासन हरसंभव मदद करने को तैयार है।

 

 

यह जिसने भी देखा कांप गया लेकिन होना तो था 'चमत्कार'


रायपुर / बिलासपुर.रायपुर बिलासपुर रोड पर मंगलवार को दोपहर 3:42 बजे दैनिक भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट भूपेश केशरवानी को यह रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य देखने को मिला।
 
एक ट्रक की ठोकर से एक बाइक सवार ट्रक के नीचे आ गया। देखने वालों का कलेजा मुंह को आ गया। लेकिन वे तब हैरत में पड़ गए जब बाइक सवार को सही सलामत ट्रक के नीचे से निकाल लिया गया। उसे इस घटना में बहुत मामूली चोट आई। दहशत अलबत्ता देर तक बरकरार रही।
 
1- ट्रक की ठोकर से बाइक सवार ट्रक के नीचे आ गया। बाइक छिटक गई। बाइक सवार ने मदद के लिए आवाज लगाई।
 
2- उसने लोगों की ओर हाथ फैलाए। इस बीच लोगों ने ट्रक वाले को रोका कि वह ट्रक जहां के तहां खड़े रहने दे।
 
3-लोगों ने बाइक सवार के हाथ पकड़े और उसे बाहर खींच लिया। तत्काल 108 पर फोन किया गया। थाने को खबर की गई।
 
4-घटना से बाइक सवार सहम गया। जान बचाने के लिए उसने भगवान से मदद करने वालों का भी शुक्रिया अदा किया।

 
 
 

 
 

अपने जिगर के टुकड़ों को गोद देना चाहती है यह 'अभागी मां'


मुंगेर.संतान प्राप्ति के लिए एक मां को दर-दर की ठोकरें खाते देखा व सुना जाता रहा है। लेकिन बिहार के मुंगेर जिले में एक मां अपनी औलाद के लिए दूसरी मां ढूंढ रही है। गरीबी, बेबसी, लाचारी और बीमारी से परेशान मुन्नी की अंतिम इच्छा है कि उसके जीते-जी कोई उसके जिगर के टुकड़े का पालनहार मिल जाये।


क्योंकि दमे की बीमारी से जूझ रही मुन्नी को अब लगने लगा है कि पैसे तथा इलाज के अभाव में ना जाने उसकी सांसे कब थम जाए! इससे पहले वह अपने आंखों के सामने दोनों बच्चे को गोद देने के लिए तैयार है। ताकि वह चैन से आखरी सांस ले इस दुनिया से विदा हो सके।


..नियति को तो कुछ और ही मंजूर था


सफियावाद इलाके के हसनगंज मोहल्ले की रहने वाली पच्चीस वर्षीय मुन्नी की शादी वैसे तो कम उम्र में ही मोहन यादव के साथ हो गई थी।

तकरीबन छह साल मोहन के साथ मुन्नी का दाम्पत्य जीवन गुजरा। इस बीच एक बेटी चांदनी (६) तथा दूसरा बेटा सूरज के पैदा हुए अभी महज दस दिन भी नहीं हुए थे कि मुन्नी का बीमार पति ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

जन्दगी के मझधार में मुन्नी अपने दो बच्चों के साथ अकेली रह गई। मजबूरन दूसरों के घरों में जूठा बर्तन व झाड़ू-पोछा कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करने का बीड़ा उठाया। लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था। इस बीच मुन्नी दमे की बीमारी से ग्रसित हो गई।


उसके पास समुचित इलाज कराने के पैसे नहीं हैं। जिस कारण वह हताश व निराश हो गई है। बच्चे की परवरिश और बीमारी की चिंता उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही है। नौकरी छोड़ कर वह सदर अस्पताल में भर्ती हो गई है। लेकिन छुट्टी के बाद उसके समक्ष दो जून की रोटी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। जब तक सदर अस्पताल में भर्ती है तब तक उसे खाना तो मिलता रहा है। मुन्नी की दुखभरी दास्तां सुन वहां मौजूद लोगों ने कुछ खाना वगैरह दिया। वह कहती है कि बच्चे जब खाना मांगेंगे तो उन्हें दूंगी। लोगों के द्वारा मिले खाने को वह स्वयं खाने से इंकार करती है। मुन्नी कहती है कि बच्चे भूखे हैं उन्हें ही खिलाउंगी। वह कहती है कि कोई उसके दोनों बच्चे चांदनी (६) और डेढ़ वर्षीय सूरज को गोद ले ले ताकि वह चैन से अंतिम सांस ले सके। रोते-बिलखते मुन्नी की आंखें अब सूनी पड़ गई हैं और हर आते-जाते लोगों को टकटकी निगाह से देखती है। इस उम्मीद से कि कहीं तो उसके बच्चे का पालनहार मिल जाये।

क्या कहते हैं डीएम


मुन्नी के मामले में जिलाधिकारी कुलदीप नारायण ने बताया कि लाचार और बेबस महिलाओं के लिए जिला कल्याण विभाग द्वारा कार्यक्रम जिले में चलाया जा रहा है। जिसके तहत आवास व भोजन की मुफ्त व्यवस्था है। मुन्नी चाहे तो वहां रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुन्नी के लिए जिला प्रशासन हरसंभव मदद करने को तैयार है।

 

 

इस देश में हर व्यक्ति के पास है कार !


अगर आप सोच रहे हैं कि हम अमेरिका या किसी अमीर यूरोपीय देश की बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। हम बात कर रहे हैं साइप्रस की। यहां दुनिया में प्रति व्यक्ति कार घनत्व सबसे ज्यादा है यहां हर 1000 व्यक्तियों में से 753 लोगों के पास कार हैं। यह देश यूरोपीय यूनियन के उन चुने हुए चार
देशों में शामिल है जहा भारत की तरह लोग लेफ्ट हैंड ड्राइविंग करते हैं।




इस देश की आय का मुख्य स्रोत टूरिज्म और वित्तीय सेवाओं से आता है। इस देश के बाद नंबर आता है आईसलैंड का यहां भी 1000 व्यक्तियो पर 736 कारें हैं प्रति व्यक्ति कार घनत्व के मामले में यह देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है। लेकिन इसकी अर्थव्यस्था चरमराने लगी है देश पर 50 अरब यूरो
का विशाल कर्ज हैं और इसकी बैंकिंग प्रणाली बुरी तरह से खोखली हो सकती है।

लेकिन आपको बात दें कि भारत और चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कारों का निर्माण करते हैं है लेकिन यहां प्रति व्यक्ति कारों का घनत्व काफी कम है। भारत में प्रति एक हजार व्यक्तियों पर सिर्फ 18 कारें है जबकि चीन में यह आंकडा सिर्फ 53 है। चीन दुनिया का सबसे ज्यादा कार निर्माण का केन्द्र है और भारत में भी कारें की बिक्री कई रिकॉर्ड बना चुकी है लेकिन प्रति व्यक्ति कार के मामले में ये दोनों देश पहले 25 देशों में भी नहीं आते हैं।

इस देश में हर व्यक्ति के पास है कार !


अगर आप सोच रहे हैं कि हम अमेरिका या किसी अमीर यूरोपीय देश की बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। हम बात कर रहे हैं साइप्रस की। यहां दुनिया में प्रति व्यक्ति कार घनत्व सबसे ज्यादा है यहां हर 1000 व्यक्तियों में से 753 लोगों के पास कार हैं। यह देश यूरोपीय यूनियन के उन चुने हुए चार
देशों में शामिल है जहा भारत की तरह लोग लेफ्ट हैंड ड्राइविंग करते हैं।




इस देश की आय का मुख्य स्रोत टूरिज्म और वित्तीय सेवाओं से आता है। इस देश के बाद नंबर आता है आईसलैंड का यहां भी 1000 व्यक्तियो पर 736 कारें हैं प्रति व्यक्ति कार घनत्व के मामले में यह देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है। लेकिन इसकी अर्थव्यस्था चरमराने लगी है देश पर 50 अरब यूरो
का विशाल कर्ज हैं और इसकी बैंकिंग प्रणाली बुरी तरह से खोखली हो सकती है।

लेकिन आपको बात दें कि भारत और चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कारों का निर्माण करते हैं है लेकिन यहां प्रति व्यक्ति कारों का घनत्व काफी कम है। भारत में प्रति एक हजार व्यक्तियों पर सिर्फ 18 कारें है जबकि चीन में यह आंकडा सिर्फ 53 है। चीन दुनिया का सबसे ज्यादा कार निर्माण का केन्द्र है और भारत में भी कारें की बिक्री कई रिकॉर्ड बना चुकी है लेकिन प्रति व्यक्ति कार के मामले में ये दोनों देश पहले 25 देशों में भी नहीं आते हैं।

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 आपकी प्रोफ़ाइल में पहले से business-oriented सवाल और retail में interest दिखा है, जो bakery जैसे fast-moving consumer product business के ल...